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Yerba Mate Cultivation: Cost and Profit Analysis for One Acre in India (2025-26)

येरबा माते की खेती: भारत में एक एकड़ में लागत और मुनाफे का विश्लेषण (2025-26)

येरबा माते की खेती: भारत में एक एकड़ में लागत और मुनाफे का विश्लेषण (2025-26)

येरबा माते, जिसे "देवताओं का पेय" कहा जाता है, दक्षिण अमेरिका में बेहद लोकप्रिय एक स्वास्थ्यवर्धक पेय है। अपने अनूठे स्वाद और ऊर्जादायक गुणों के कारण यह दुनिया भर में, खासकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। भारत के किसानों के लिए, यह एक नई और संभावित रूप से उच्च-मूल्य वाली बागवानी फसल का अवसर प्रस्तुत करता है।

चूंकि भारत में इसकी खेती अभी प्रयोगात्मक चरण में है, कई प्रगतिशील किसान यह सवाल पूछ रहे हैं: "क्या येरबा माते भारत में उगाया जा सकता है? यदि हाँ, तो एक एकड़ में कितना प्रारंभिक निवेश और वार्षिक मुनाफा हो सकता है?"

यह गाइड एक एकड़ भूमि पर येरबा माते की खेती के लिए लागत और मुनाफे की एक अनुमानित गणना प्रदान करता है, जो 2025-26 सीजन के लिए अनुकूलित कृषि पद्धतियों और अनुमानित बाजार दरों पर आधारित है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि येरबा माते भारत के लिए एक नई फसल है। नीचे दिए गए आंकड़े अंतरराष्ट्रीय डेटा और भारतीय परिस्थितियों के आधार पर बनाए गए अनुमान हैं। वास्तविक लागत, उपज और बाजार मूल्य आपके स्थान, जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता, प्रसंस्करण तकनीकों और बाजार के विकास के आधार पर काफी भिन्न हो सकते हैं।

हमारी गणना के लिए बुनियादी मान्यताएँ:

  • भूमि क्षेत्र (Land Area): 1 एकड़
  • पौधे का प्रकार (Plant Type): बारहमासी झाड़ी/पेड़
  • स्थापना अवधि (Establishment Period): 4 से 5 साल (पहली बड़ी फसल के लिए)
  • खेती की विधि (Farming Method): मानक जैविक या अच्छी कृषि पद्धतियां।
  • विश्लेषण का आधार (Analysis Basis): हम एक स्थापित, परिपक्व बागान (5+ वर्ष पुराने) के वार्षिक खर्च और मुनाफे का विश्लेषण करेंगे।

भाग 1: एक एकड़ में कुल निवेश (कुल लागत)

येरबा माते एक बारहमासी फसल है, इसलिए इसकी लागत को दो भागों में बांटा जाना चाहिए: एकमुश्त स्थापना लागत और वार्षिक परिचालन लागत

1. एकमुश्त स्थापना लागत (पहले 4-5 वर्षों के लिए)

यह प्रारंभिक निवेश है जो बागान को पहली फसल के लिए तैयार करने तक लगता है।

खर्च का विवरण जानकारी अनुमानित लागत (₹)
1. खेत की तैयारी गहरी जुताई, समतलीकरण, और गड्ढे खोदना। ₹ 8,000
2. पौधे (सबसे बड़ा खर्च) 1100-1200 अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे। औसत दर @ ₹60/पौधा। ₹ 66,000
3. रोपण का श्रम गड्ढों में पौधे लगाने और स्थापित करने की मजदूरी। ₹ 6,000
4. खाद और उर्वरक (पहले 4 साल) जैविक खाद और पोषक तत्वों का प्रारंभिक अनुप्रयोग। ₹ 25,000
5. सिंचाई प्रणाली ड्रिप सिंचाई प्रणाली की स्थापना की सिफारिश की जाती है। ₹ 35,000
6. प्रारंभिक वर्षों का रखरखाव निराई-गुड़ाई, छंटाई और देखभाल (4 वर्षों के लिए)। ₹ 40,000
कुल अनुमानित स्थापना लागत (A) ₹ 1,80,000

2. वार्षिक परिचालन लागत (परिपक्व बागान के लिए)

एक बार जब बागान परिपक्व हो जाता है (5वें वर्ष के बाद), तो ये वार्षिक खर्च होते हैं।

खर्च का विवरण जानकारी अनुमानित लागत (₹)
1. खाद और उर्वरक वार्षिक जैविक खाद और पोषक तत्वों का अनुप्रयोग। ₹ 10,000
2. सिंचाई मौसम के आधार पर सिंचाई की लागत। ₹ 8,000
3. छंटाई और रखरखाव पौधों को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रखने के लिए वार्षिक छंटाई। ₹ 7,000
4. कीट और रोग प्रबंधन जैविक स्प्रे और निवारक उपायों की लागत। ₹ 5,000
5. कटाई का श्रम (Harvesting Labour) पत्तियों और टहनियों को काटने के लिए श्रम। ₹ 15,000
6. प्रसंस्करण (Processing) पत्तियों को सुखाना, एजिंग (aging) और मिलिंग करना। यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। ₹ 20,000
7. विविध खर्च परिवहन, पैकेजिंग, और अन्य अप्रत्याशित खर्च। ₹ 10,000
कुल वार्षिक परिचालन लागत (B) ₹ 75,000

भाग 2: वार्षिक आय और शुद्ध लाभ की गणना

मुनाफा सीधे तौर पर सूखी पत्तियों की उपज और बाजार में मिलने वाले भाव पर निर्भर करता है।

कदम 1: पैदावार की गणना (Yield)

  • हरी पत्तियों की औसत उपज: एक एकड़ के परिपक्व बागान से, एक किसान प्रति वर्ष 4,000 किलो से 5,000 किलो हरी पत्तियों की उम्मीद कर सकता है। हम औसत 4,500 किलो लेते हैं।
  • सूखी पत्तियों की गणना: हरी पत्तियों से सूखी पत्तियों की रिकवरी दर लगभग 3:1 होती है (यानी 33%)।
  • अंतिम सूखी उपज = 4,500 किलो (हरी उपज) / 3 = 1,500 किलो (15 क्विंटल)

कदम 2: कुल आय की गणना (Gross Income)

चूंकि भारत में येरबा माते का कोई स्थापित बाजार नहीं है, इसलिए कीमत का अनुमान लगाना सबसे मुश्किल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारत में आयातित उत्पादों की कीमतों के आधार पर, हम अच्छी गुणवत्ता वाली सूखी पत्तियों के लिए ₹250 प्रति किलो का एक रूढ़िवादी अनुमानित फार्म-गेट मूल्य मान सकते हैं।

कुल आय (C) = कुल सूखी उपज x बाजार मूल्य
कुल आय = 1,500 किलो x ₹250/किलो = ₹ 3,75,000

कदम 3: शुद्ध लाभ की गणना (Net Profit)

वार्षिक शुद्ध लाभ = कुल आय (C) - कुल वार्षिक परिचालन लागत (B)
शुद्ध लाभ = ₹ 3,75,000 - ₹ 75,000
वार्षिक शुद्ध लाभ = ₹ 3,00,000 प्रति एकड़

(नोट: यह लाभ प्रारंभिक ₹1,80,000 की स्थापना लागत की वसूली के बाद ही वास्तविक होता है।)


मुनाफे को बहुत प्रभावित करने वाले कारक

  • बाजार का विकास: यह सबसे बड़ा कारक है। किसानों को सीधे विशेष चाय कंपनियों, स्वास्थ्य कैफे या ऑनलाइन उपभोक्ताओं को बेचने के लिए बाजार बनाना होगा।
  • प्रसंस्करण की गुणवत्ता: पत्तियों को सुखाने और एजिंग करने की प्रक्रिया अंतिम स्वाद और कीमत को बहुत प्रभावित करती है। उचित तकनीक में निवेश आवश्यक है।
  • जलवायु अनुकूलता: यह फसल केवल भारत के कुछ उपोष्णकटिबंधीय, अच्छी वर्षा वाले और ठंडे क्षेत्रों (जैसे पूर्वोत्तर राज्य, पश्चिमी घाट के कुछ हिस्से) के लिए उपयुक्त हो सकती है।
  • मूल्य संवर्धन (Value Addition): कच्ची पत्तियों को बेचने के बजाय, टी-बैग, फ्लेवर्ड मिश्रण या रेडी-टू-ड्रिंक उत्पादों के रूप में ब्रांडिंग और बिक्री से मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

येरबा

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